अब और नहीं होंगे पठानकोट जैसे हमले, एयरबेस की सुरक्षा के लिए उठाए गए ये कदम
पठानकोट एयर बेस पर आतंकी हमले के बाद वायुसेना ने ऐसे कई कदम उठाये जिसमें एयर बेस की सुरक्षा को अभेद्य बनाया जा सके. वायुसेना ने पहली बार अपने एयर वारियर्स के लिए खास क्यूआरटी यानी क्यूक रिएक्शन ट्रेनिंग स्कूल शुरू किया है.

पठानकोट एयर बेस पर आतंकी हमले के बाद वायुसेना ने ऐसे कई कदम उठाये जिसमें एयर बेस की सुरक्षा को अभेद्य बनाया जा सके. वायुसेना ने पहली बार अपने एयर वारियर्स के लिए खास क्यूआरटी यानी क्यूक रिएक्शन ट्रेनिंग स्कूल शुरू किया है. इसका नाम है वन सिक्युरिटी ट्रेनिंग स्कूल जिसका मकसद हर एयर बेस की सुरक्षा के लिए पहली रक्षा पंक्ति तैयार करना है. इसी कड़ी में वायुसेना अपने एयरमैन और ऑफिसर को खास ट्रेनिंग दे रही है. जिससे आने वाले दिनों में किसी भी आतंकी हमले को नाकाम किया जा सके. वायुसेना के एयरमैन और ऑफिसर के लिए रेगुलर ट्रेनिंग के अलावा ये खास क्यूआरटी ट्रेनिंग है. आजतक पर पढ़िये कैसे एयर फ़ोर्स के ख़ास वन सिक्युरिटी ट्रेनिंग स्कूल भटिंडा में कैसे बन रहे आतंक का खत्मा करने वाले एयर वारियर्स.

चार हफ्ते की इस खास ट्रेनिंग में आधुनिक हथियारों के साथ ही कड़ी शारीरिक ट्रेनिंग दी जाती हैं. ट्रेनिंग में वायुसेना के एयरमैन और ऑफिसर को एक साथ ट्रेनिंग दी जाती है, ट्रेनिंग बहुत कड़ी होती है. ट्रेनिंग के दौरान इन्हें कई पड़ावों से गुजरना होता है. इसमें जवानों को हवा में, पानी में और जंगल में घात लगाकर मार करने की तकनीक सिखाई जाती है. आधुनिक हथियारों से लैस ये एयर वारियर्स रात के अंधेरे में भी दुश्मन को पहचान कर उनका खात्मा करने में ट्रेंड होते हैं. पठानकोट आतंकी हमले के वक्त आतंकी एयर बेस के आसपास मौजूद जंगल और घासफूस का फायदा उठाकर अंदर दाखिल हुए थे. ट्रेनिंग में इस तरह के हमले को नाकाम करने की ख़ास ट्रेनिंग दी जाती है.

माक्क ड्रिल
कुछ संदिग्ध जंगल और घासफूस का फायदा उठाकर एयर बेस के अंदर दाखिल हो चुके हैं. ऐसे में सबसे पहला मोर्चा क्यूक रिएक्शन टीम ने संभाल लिया. गाड़ी से फुर्ती से उतरते ही क्यूआरटी ने अपनी-अपनी पोजीशन संभाल ली. अचानक फायरिंग शुरू होते ही हमनें भी अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बुलेट प्रूफ जैकेट और हेलमेट पहन लिया. आतंकियों ने ग्रिनेड से हमला और फायरिंग शुरू कर दी. क्यूआरटी टीम ने भी जवाबी फायरिंग शुरू कर दी. क्यूआरटी टीम के जवान तेजी के साथ संदिग्ध आतंकियों का पीछा शुरू कर देते हैं. जंगल का फायदा उठाकर आतंकी एयर बेस के अंदर एक बिल्डिंग में घुसने में कामयाब हो जाते हैं. ऐसे मुश्किल और चौंकाने वाले हालत से लड़ने के लिए ही वायुसेना अपने जवानों को तैयार कर रही है. क्यूआरटी टीम का पूरा फोकस इस बात है कि किसी भी हालत में संदिग्ध एयर बेस में अपने मंसूबों में कामयाब न हो पाएं. इसी तरह की हर मुश्किल हालत में जवान का असली साथी उसका हथियार होता है. एक गोली एक दुश्मन के मन्त्र के साथ जवान अपने लक्ष्य पर निशाना साध रहे हैं. नजदीकी लड़ाई में अचूक निशाना बहुत जरूरी होता है इसीलिए यहाँ पर हर जवान पूरी सिद्द्त से निशाना लगा रहा है. अचूक निशाना लगाने के लिए फायरिंग का ये सिलसिला कई राउंड चलता है.

भटिंडा एयर बेस के स्टेशन कमांडर ग्रुप कैप्टन एस पसरीचा के मुताबिक हर मौके पर कैसे दुश्मन को कोई मौक़ा न मिले सारा जोर इस बात दिया जाता है.

आपको बता दें कि इस ट्रेनिंग का एक ख़ास हिस्सा होता है, कैमोफ्लाज एंड कन्सीलमेंट क्लास यानी आसापास के इलाके के हिसाब से खुद को छुपाना. इस ऑपरेशन के दौरान जवान कुछ ख़ास तरह की ड्रेस पहनकर आसपास की घासफूस में छुप जाते हैं. कैमोफ्लाज एंड कन्सीलमेंट ऑपरेशन के दौरान जब कुछ जवानों को इस मिशन में लगाया तो वे छुपे जवानों को नहीं ढूंढ पाए और अचानक घासफूस में छुपे जवानों ने सबको चौंका दिया.

दरअसल वायुसेना के ज्यादातर बेस दूरदराज और बड़े इलाकों में फैले हुए होते हैं. ऐसे में इनकी सुरक्षा एक बड़ी चुनौती होती है. बड़े इलाके में फैले एयर बेस, हवाई पट्टी और उसके साथ मौजूद सामरिक तौर पर अहम हवाई जहाजों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है. ऐसे में मात्र कुछ सुरक्षा कर्मियों से एयर बेस की पूरी सुरक्षा को चाक चौबंद करना आसान नहीं है. इसीलिए हर एयरमैन को क्यूआरटी का हिस्सा बनाया जा रहा है, यानी हर एयरमैन कमांडो बनकर आतंकियों का मुकाबला कर सके.

जवानों की ट्रेंनिंग
जवानों की ट्रेंनिंग आगे बहुत ही मुश्किल होती जा रही है. जंगल के इलाके में बारूदी सुरंग और खाई को पार करते हुए दुश्मन का पीछा करना. इस ऑपरेशन के दौरान जवान बडी पियर यानी जोड़ी बनाकर आगे बढ़ रहे हैं. कदम-कदम पर खतरा बढ़ता जा रहा है. सभी जवान सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं. सावधानी हटी दुर्घटना घटी की तर्ज पर इस मिशन को अंजाम देना है. कंटीले तारों के नीचे से बिना आवाज रेंगकर निकलना है. आगे मुश्किलें और भी हैं पानी के तालाब में अपने हथियार को बचाते हुए आगे बढ़ना है. इस कड़ी ट्रेंनिंग के पीछे मकसद है कि जवान आग, पानी गोलाबारी हर तरह के हालात में अपने को ढाल लें. वन एसटीएस मुख्य प्रशिक्षक विंग कमांडर मनप्रीत सिंह ने बताया कि बारूदी सुरंग, तालाब और खाई को पार करके जवान अपने मिशन को पूरा करने में कामयाब रहे.

रात में होने वाले आतंकी हमले से मुकाबले की ट्रेंनिंग
अब हम आपको बताते हैं की रात के वक्त अगर आतंकी घुसपैठ की कोशिश करें तो उससे कैसे निपटनना है. हाल के दिनों में पठानकोट से लेकर उरी में हुए आतंकी हमले रात के अँधेरे का फायदा उठाकर ही हुए हैं. ऐसे में वायुसेना के इन जवानों को नाइट पेट्रोलिंग की ख़ास ट्रेनिंग दी जा रही है. रात के वक्त पेट्रोलिंग में भी सावधानी के साथ आगे बढ़ाना पड़ता है. तभी अचानक फायरिंग की आवाज से सभी जवान अपनी पोजीशन संभाल लेते हैं.

वायुसेना की इस क्यूआरटी ट्रेनिंग में ख़ास बात है कि महिला अधिकरी अपने पुरुष साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. क्यूआरटी ट्रेनिंग की तमाम मुश्किलात से महिला अधिकारी भी दो चार हो रही हैं. प्रशिक्षक स्काड्रन लीडर मिहिर मेहता ने बताया कि आतंक के बढ़ते खतरे से निपटने की इस ख़ास ट्रेनिंग में महिला और पुरुष अधिकारी और जवान एक साथ हर तरह की शारीरिक और मानसिक चुनौती से जूझ रहे हैं.

पठानकोट आतंकी हमले के बाद पहली बार वायुसेना के भटिंडा एयर बेस में शुरू हुए वन सिक्युरिटी ट्रेनिंग स्कूल में अब तक पांच बैच पास हो चुके हैं. यहां से क्यूआरटी की ख़ास ट्रेनिंग लेकर निकले एयर वारियर देश के अलग एयर बेस पर मोर्चा संभाल चुके हैं. एयरफोर्स आने वाले दिनों में ऐसे और खास सिक्युरिटी ट्रेनिंग स्कूल खोलेगा जिससे देश में हर एयर बेस में आतंक से मुकाबले के लिए पहली मजबूत रक्षा दीवार तैयार की जा सके.

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