ऋतु परिवर्तन के साथ ही राजाधिराज महाकाल के दैनिक कार्यों में परिवर्तन आता है। भगवान महाकाल छह महीने तक गर्म पानी और छह महीने तक ठंडे पानी में स्नान करते हैं। इसी क्रम में 12 नवंबर को कार्तिक की चौदस पर गर्म स्नान शुरू होगा। यह क्रम फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक जारी रहेगा।
महाकालेश्वर मंदिर में ऋतुओं के अनुसार भगवान की सेवा की जाती है। सर्दियों में भगवान को गर्म पानी से स्नान कराया जाता है। इसकी शुरुआत रूप चौदस पर अभयंग स्नान से होती है। रूप चौदस पर भगवान महाकाल का स्वरूप बढ़ाने के लिए उन्हें जल से स्नान कराया जाएगा। दीपावली पर सुबह भस्म आरती और शाम व रात को दीपों व फूलों की व्यवस्था के साथ शयन आरती होगी। महाकाल मंदिर में प्रत्येक उत्सव एक दिन पहले मनाया जाता है।
पं महेश पुजारी ने बताया कि रूप चौदस पर महाकाल मंदिर में दीपावली मनाई जाएगी। तड़के भस्म आरती में भगवान का पंचामृत अभिषेक करने के बाद पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान महाकाल को उबटन लगाएंगी। इसके बाद भगवान को गर्म पानी से स्नान कराया जाएगा।
